PKVY Scheme पारंपरिक कृषि खेती की तुलना में जैविक खेती सेहत के लिए लाभदायक होती है। जैविक खेती में कम कीटनाशकों का उपयोग होता है। और जैविक खेती में भूजल और सतह के पानी में नाइट्रेट की लीचिंग को कम करती है। इसी बजह से सरकार द्वारा किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित की जा रही है। PKVY Scheme के डिटेल्स बताए हुए है

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा PKVY Scheme को शुरू किया गया है | इस योजना के माध्यम से किसानों को जैविक खेती करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी | PKVY Scheme के सभी जानकारी हम इस लेख के माध्यम से बताएँगे PKVY Full Form Paramparagat Krishi Vikas Yojana होता है

PKVY Scheme को सॉइल हेल्थ योजना के तहत शुरू किया गया है। इस योजना के माध्यम से किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित की जा रही है। इस योजना के लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दिया जा रहा है कृषि विकास योजना के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान के माध्यम से जैविक खेती के स्थाई मॉडल का विकसित किया जाएगा। 

PKVY Scheme परपरागत कृषि विकास योजना के मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाना है। और इस योजना के माध्यम से क्लस्टर निर्माण, क्षमता निर्माण, आदनो के लिए प्रोत्साहन, मूल्यवर्धन और विपरण के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है | इस योजना को सन 2015-16 में रसायनिक मुक्त जैविक खेती को क्लस्टर मोड में बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था

Paramparagat Krishi Vikas Yojana के माध्यम से क्लस्टर निर्माण, क्षमता निर्माण, आदनो के लिए प्रोत्साहन, मूल्यवर्धन और विपरण के लिए 50 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर 3 वर्षो के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें से 31 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर 3 वर्षो के लिए जैविक पदार्थों जैसे कि जैविक उर्वरकों, कीटनाशकों, बीजों इत्यादि की खरीद के लिए दी जाती है।

इसके अलावा मूल्यवर्धन और विपरण के लिए 8 हजार 800 सौ रूपये प्रति हेक्टेयर 3 वर्षों के लिए दिया जाता है PKVY Scheme के माध्यम से पिछले 4 वर्षों में 1197 करोड़ रूपये खर्च की जा चुकी है। इस योजना के माध्यम से क्लस्टर निर्माण एवं क्षमता निर्माण के लिए 3 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर 3 वर्षों के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। जिसमें एक्स्पोज़र विजिट और फील्ड कर्मियों के प्रशिक्षण शामिल है। यह राशि किसानों के खातो में DBT यानि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से दिया जाती है।

PKVY Scheme के तहत प्रत्येक क्लस्टर के लिए 14.95 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मोबिलाइजेशंस, मनूर मैनेजमेंट, एवं पीजीएस सर्टिफिकेट के एडॉप्शन के लिए दी जाएगी। 50 एकड़ या 20 हेक्टेयर के क्लस्टर के लिए अधिकतम राशी 10 लाख रूपये की आर्थिक सहायता की जाएगी। खाद प्रबंधन और जैविक नाइट्रोजन संचयन की गतिविधियों के तहत प्रत्येक किसान को अधिकतम 50 हजार की राशि प्रति हेक्टेयर उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अलावा कुल सहायता में से 4.95 लाख रूपये प्रति क्लस्टर पीजीएस प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण को जुटाने और अपनाने के लिए कार्यान्वयन एजेंसी को मुहैया कराये जाएँगे

योजना का नाम परपरागत कृषि विकास योजना
आरम्भ की गयी केंद्र सरकार द्वारा
उधेश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना
लाभार्थी देश के किसान
आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन / ऑफलाइन
अधिकारिक वेबसाइट Click Here
Sarkari Yojana Pmmodiyojnaa.com

परम्परागत कृषि विकास योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत किसानों को जैविक खेती करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह योजना मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने में भी लाभदायक साबित होगी। इसके अलावा इस योजना के माध्यम से रसायनिक मुक्त एवं पौष्टिक भोजन का उत्पादन हो सकेगा क्योंकि जैविक खेती में कम कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। इस योजना के जैविक खेती में क्लस्टर मोड को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी शुरू किया गया है

इस योजना के अंतर्गत मॉडल ऑर्गेनिक क्लास मनस्ट्रेशन के माध्यम से किसानों को जैविक खेती करने के लिए जागरूकता की जाएगी | इससे ग्रामीण युवा किसान, उपभोक्ता और व्यापारी जैविक खेती करे यह जागरूकता किसानों को परम्परागत कृषि विकास योजना के माध्यम से की जाएगी

परम्परागत कृषि विकास योजना के कार्यान्वयन एजेंसी नेशनल सेंटर ऑफ़ ऑर्गेनिक फार्मिंग, पार्टिसिपेटरी गारेंटी सिस्टम, पंजीकृत क्षेत्रीय परिषद्  एवं डीएसी और F.W. के अन्य सार्वजानिक क्षेत्र के संगठन होंगे | इस योजना के तहत रिमॉन्सट्रेशन एक्सपर्ट और साइंटिस्ट की निगरानी में किया जाएगा और इस प्रोजेक्ट डिमॉन्सट्रेशन टीम की गठन की जाएगी जिससे इस योजना के अच्छी कार्यान्वयन की जा सके

  • मॉडल ऑर्गेनिक फार्म के माध्यम से पारंपरिक भूमि को 1 हेक्टेयर के जैविक कृषि पध्दति में परिवर्तित किया जाएगा |
  • किसानों को जैविक खेती करने के लिए विभिन्न नवीनतम तकनीकों से संबंधित जानकारी दी जाएगी |
  • प्रति 1 संगठन को न्यूनतम एक वर्ष में अधिकतम तीन मॉडल आवंटित किया जाएगा
  • परम्परागत कृषि विकास योजना की आरम्भ भारत सरकार द्वारा किया गया है
  • परम्परागत कृषि योजना को सोयल हेल्थ योजना के तहत आरम्भ किया गया है
  • इस योजना के अंतर्गत किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और खेती करने के लिए आर्थिक सहायता दिया जाता है 
  • इस योजना में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विकास के माध्यम से खेती के स्थाई मॉडल विक्सित करने में मदद करेगी |
  • परम्परागत कृषि योजना के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता को बढ़ावा दिया जाएगा |
  • इस योजना के माध्यम से क्लस्टर निर्माण, क्षमता निर्माण आदानों के लिए प्रोत्साहन, मूल्यवर्धन एवं वितरण के लिए आर्थिक सहायता दिया जाता है
  • इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा किसानों को जैविक खेती के लिए 50 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर 3 वर्षो के लिए आर्थिक सहायता दिया जाता है
  • सन 2015-16 में रसायनिक मुक्त जैविक खेती को क्लस्टर मोड में बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है
  • उस राशी में से 31 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर की राशी जैविक उर्वरकों, कीटनाशकों, बीजों इत्यादि के लिए दिया जाएगा
  • मूल्यवर्धन और वितरण के लिए 8 हजार 800 रूपये दिया जाएगा
  • उसके बाद क्लस्टर निर्माण और क्षमता निर्माण के लिए 3 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर दिया जाएगा | जिसमे एक्स्पोज़र विजिट और फील्ड कर्मियों का प्रशिक्षण शामिल है।
  • इस योजना के अंतर्गत पिछले 4 वर्षों में 1197 करोड़ रूपये खर्च किया जा चूका है
  • इस योजना के माध्यम से लाभ की राशी किसानों के खाते में DBT यानि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से दिया जाता है
  • इस योजना के अंतर्गत जैविक खेती करने के लिए चुना गया क्लस्टर 20 हेक्टेयर या 50 एकड़ की सीमा में और जितना संभव हो सके उतना सन्निहित रूप में होना चाहिए।
  • 20 हेक्टेयर या 50 एकड़ क्लस्टर के लिए उपलब्ध कुल वित्तीय सहायता अधिकतम 10 लाख रूपये होगी।
  • एक क्लस्टर में किसानों की कुल संख्या में कम से कम 65% किसानों को लघु और सीमांत श्रेणी के लिए आवंटित किया जाएगा।
  • इस योजना के तहत बजट आवंटन का कम से कम 30% महिला लाभार्थी/ किसानों के लिए निर्धारित करना आवश्यक है।
  • इस योजना के तहत पीजिएस सर्टिफिकेशन एवं क्वालिटी कंट्रोल 3 वर्ष का प्रोग्राम है। जिसके लिए रीजनल काउंसिल को अपना एक्शन प्लान जमा करना होगा।
  • यह एक्शन प्लान स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर को जमा किया जाएगा।
  • एक्शन प्लान के अप्रूवल के पश्चात राज्यों को वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  • वित्तीय सहायता प्राप्त होने के पश्चात रीजनल काउंसिल द्वारा लोकल ग्रुप एवं किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी |
  • एनुअल एक्शन प्लान रीजनल काउंसिल द्वारा मार्च में जमा कर दी जाएगी
  • मई तक एक्शन प्लान का अप्रूवल केंद्र सरकार द्वारा दिया जाएगा एवं मध्य मई में वित्तीय सहायता रीजनल काउंसिल को दे दी जाएगी।
  • राष्ट्रीय स्तर कार्यान्वयन – प्रधानमंत्री परम्परागत कृषि विकास योजना को इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट के ऑर्गेनिक फार्मिंग सेल के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी | और इस योजना के दिशा निर्देश नेशनल एडवाइजरी कमिटी के ज्वाइंट डायरेक्टर के माध्यम से तैयार किया जाएगा | राष्ट्रीय स्तर पर योजना का कार्यान्वयन डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, कोऑपरेटिव एंड फार्मर वेलफेयर के माध्यम से की जाएगी |
  • राज्य स्तर कार्यान्वयन – कृषि विकास योजना का कार्यान्वयन राज्य कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा किया जाएगा। विभाग द्वारा पंजीकृत क्षेत्रीय परिषदों की भागीदारी के साथ योजना को लागू की जाएगी |
  • जिला स्तरीय कार्यान्वयन – कृषि विकास योजना का जिला स्तरीय कार्यान्वयन रीजनल काउंसिल के माध्यम से किया जाएगा। एक जिला में एक या एक से अधिक रीजनल काउंसिल भी हो सकते हैं जो सोसाइटीज एक्ट, पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, कोऑपरेटिव एक्ट या कंपनीज एक्ट के अंडर रजिस्टर्ड होंगे
  • आवेदक भारत के स्थाई निवासी होनी चाहिए
  • इस योजना के तहत आवेदक किसान होने चाहिए
  • आवेदक की उम्र 18 वर्ष से होना चाहिए
  • आधार कार्ड
  • राशन कार्ड
  • आय प्रमाण पत्र
  • निवास प्रमाण पत्र
  • आयु प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो
  • मोबाइल नंबर
  • सबसे पहले आपको अधिकारिक वेबसाइट पर जाना है
  • जाने के बाद अप्लाई नाउ के आप्शन पर क्लिक करना है क्लिक करते ही आवेदन फॉर्म खुल कर आ जाएगा
  • इसके बाद आवेदन फॉर्म में पूछी गई  सभी जानकारी भरने के बाद दस्तावेज को अपलोड करना होगा अपलोड करने के बाद सबमिट कर देना है और आपका इस प्रकार आवेदन हो जाएगा

सबसे पहले आपको अधिकारिक वेबसाइट पर जाना है और कांटेक्ट अस के आप्शन पर क्लिक कर के कांटेक्ट अस देख सकते है